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Monday, February 1, 2016

सेलिना गोमेज़



जन्मनाम सेलिना मारी गोमेज़
जन्म जुलाई 22, 1992 (आयु 23 वर्ष)
ग्रांड प्रैरी, टेक्सास, अमेरिका
शैली पॉप, नृत्य, आरएंड, हिपहॉप, बीपॉप रॉक[1]
व्यवसाय अभिनेत्री, गायिका, फैशन डिजाइनर
वाद्य यन्त्र आवाज, पियानो, गिटार, ड्रम
सक्रिय वर्ष 2002–अबतक
रिकॉर्ड लेबल होलीवूड
संबंधित प्रदर्शन सेलिना गोमेज़ एंड द सीन, जस्टिन बीबर, डेमी लोवाटो, टेलर स्विफ्ट माईली सायरस
जालस्थल/वेबसाइट SelenaGomez.com
सेलिना मारी गोमेज़ (अंग्रेज़ी: Selena Marie Gomez; जन्म २२ जुलाई १९९२[2]) एक अमेरिकी अभिनेत्री व गायिका है जो डिज़्नी चैनल के एमी पुरस्कार विजेता टेलीविजन धारावाहिक विज़ार्ड ऑफ़ वेवर्ली प्लेस में एलेक्स रूसो की भूमिका के लिए जानी जाती है। उन्होंने अनादर सिंड्रेला स्टोरी, विज़ार्ड ऑफ़ वेवर्ली प्लेस: द मूवी और प्रिंसेस प्रोटेक्शन प्रोग्राम जैसी मुख्य व टेलीविजन फ़िल्मों में भी अभिनय किया है। उन्होंने बड़े पर्दें की फ़िल्मों में रमोना एंड बीज़ुस से पदार्पण किया।

उनका करियर संगीत उद्योग में भी फ़ैल शुका है। वे सेलिना गोमेज़ एंड द सीन नाम के पॉप बैंड की मुख्य गायिका व संस्थापक है जो आरआईएए द्वारा स्वर्ण प्रमाणित तिन अल्बम, किस एंड टेल, अ इयर विथाउट रेन और व्हेन द सन गोज़ डाउन, बना चूका
है।



व्यक्तिगत जीवन

गोमेज़ का जन्म ग्रांड प्रैरी, टेक्सास में हुआ था।[2] वे पूर्व मंच अभिनेत्री अमैंडा डान "मैंडी" टीफी और रिकार्डो जोएल गोमेज़ की बेटी है।[3][4][5] उनके पिता मेक्सिकी वंश के व माँ इतालवी वंश की है।[6][7] जब वे पाँच वर्ष की थी तब उनके माता-पिता का तलाक हो गया और उनकी एकलौती संतान के रूप में उनकी माँ ने परवरिश की।[3][8] २००६ में मैंडी ने ब्रायन टीफी से पुनर्विवाह किया।[9] उनका नामकरण तेजानो गायिका सेलिना के नाम पर किया गया है जो गोमेज़ के जन्म के तिन वर्ष बाद ही चल बसी थी।[10] २००९ में पीपल मैगज़ीन के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया की उन्हें अभिनय में रुची अपनी माँ को मंच पर अभिनय का रियास करते हुए देख कर हुई।[8]

२७ फ़रवरी २०११ को गोमेज़ २०११ वैनिटी फ़ेयर ऑस्कर पार्टी में कनेडियाई गायक जस्टिन बीबर के साथ शामिल हुई[11] जिससे इस बात की पुष्टि हो गई की दोनों के बिच प्रेम संबंध है।[12][13][14][15][16][17]

अभिनय करियर

२००२-०६: बार्नी एंड फ्रेंड्स और शुरूआती कार्य संपादित करें
गोमेज़ ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत सात वर्ष की आयु में बार्नी एंड फ्रेंड्स में जियाना की भूमिका अदा करने से की।[18] उन्होंने आगे चलकर स्पाय किड्स ३-डी: गेम ओवर और टीवी फ़िल्म वाकर, टेक्सास रेंजर: ट्रायल बाई फ़ायर में छोटी भूमिका निभाई।

२००४ में गोमेज़ को डिज़्नी चैनल ने एक अमेरिका-भर में चली खोज में ढूंड निकाला।[19] गोमेज़ द सूट लाइफ़ ऑफ़ ज़ैक एंड कोड़ी में अतिथि भूमिका में नज़र आई और आगे चलकर हैनाह मोंटाना में भी उन्होंने अभिनय किया।

बराक ओबामा


बराक हुसैन ओबामा

अमेरिका के ४४वें राष्ट्रपति
पदस्थ
कार्यकाल प्रारंभ
२० जनवरी, २००९
उप राष्ट्रपति   जो बिडेन
पूर्ववर्ती जॉर्ज वॉकर बुश
जन्म ४ अगस्त १९६१
होनोलूलू, हवाई
राजनैतिक पार्टी डेमोक्रैटिक पार्टी
जीवनसंगी मिशेल ओबामा
बराक हुसैन ओबामा (अंग्रेज़ी: Barack Hussein Obama, जन्म: ४ अगस्त, १९६१) अमरीका के ४४वें राष्ट्रपति हैं। वे इस देश के प्रथम अश्वेत (अफ्रीकी अमरीकन) राष्ट्रपति हैं। उन्होंने २० जनवरी, २००९ को राष्ट्रपति पद की शपथ ली। ओबामा इलिनॉय प्रांत से कनिष्ठ सेनेटर तथा २००८ में अमरीका के राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रैटिक पार्टी के उम्मीदवार थे। ओबामा हार्वर्ड लॉ स्कूल से १९९१ में स्नातक बनें, जहाँ वे हार्वर्ड लॉ रिव्यू के पहले अफ्रीकी अमरीकी अध्यक्ष भी रहे। १९९७ से २००४ इलिनॉय सेनेट में तीन सेवाकाल पूर्ण करने के पूर्व ओबामा ने सामुदायिक आयोजक के रूप में कार्य किया है और नागरिक अधिकार अधिवक्ता के रूप में प्रेक्टिस की है। १९९२ से २००४ तक उन्होंने शिकागो विधि विश्वविद्यालय में संवैधानिक कानून का अध्यापन भी किया। सन् २००० में अमेरिकी हाउस आफ रिप्रेसेंटेटिव में सीट हासिल करने में असफल होने के बाद जनवरी २००३ में उन्होंने अमरीकी सेनेट का रुख किया और मार्च २००४ में प्राथमिक विजय हासिल की। नवंबर २००३ में सेनेट के लिये चुने गये।

१०९वें काँग्रेस में अल्पसंख्य डेमोक्रैट सदस्य के रूप में उन्होंने पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण तथा संघीय कोष के प्रयोग में अधिक सार्वजनिक उत्तरदायित्व का समर्थन करते विधेयकों के निर्माण में सहयोग दिया। वे पूर्वी युरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका की राजकीय यात्रा पर भी गये। ११०वें काँग्रेस में लॉबिंग व चुनावी घोटालों, पर्यावरण के बदलाव, नाभिकीय आतंकवाद और युद्ध से लौटे अमेरीकी सैनिकों की देखरेख से संबंधित विधेयकों के निर्माण में उन्होंने सहयोग दिया। विश्वशांति में उल्लेखनीय योगदान के लिए बराक ओबामा को वर्ष 2009 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है।[1]


प्रारंभिक जीवन

होनोलूलू में जन्में ओबामा किन्याई मूल के अश्वेत पिता व अमरीकी मूल की माता के संतान हैं। उनका अधिकांश प्रारंभिक जीवन अमरीका के हवाई प्रांत में बीता। ६ से १० वर्ष तक की अवस्था उन्होंने जकार्ता, इंडोनेशिया में अपनी माता और इंडोनेशियाई सौतेले पिता के संग बिताया। बाल्यकाल में उन्हें बैरी नाम से पुकारा जाता था। बाद में वे होनोलूलू वापस आकर अपनी ननिहाल में ही रहने लगे। १९९५ में उनकी माता का कैंसर से देहांत हो गया। ओबामा की पत्नी का नाम मिशेल है। उनका विवाह १९९२ में हुआ जिससे उनकी दो पुत्रियाँ हैं, ९ वर्षीय मालिया तथा ६ वर्षीय साशा। २ नवम्बर २००८ को ओबामा का आरंभिक लालन पालन करने वाली उनकी दादी मेडलिन दुनहम का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया[2]।

ओबामा हार्वड लॉ स्कूल से १९९१ में स्नातक बनें, जहाँ वे हार्वड लॉ रिव्यू के पहले अफ्रीकी अमरीकी अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने दो लोकप्रिय पुस्तकें भी लिखी हैं, पहली पुस्तक ड्रीम्स फ्रॉम माई फादरः अ स्टोरी आफ रेस एंड इन्हेरिटेंस का प्रकाशन लॉ स्कूल से स्नातक बनने के कुछ दिन बाद ही हुआ था। इस पुस्तक में उनके होनोलूलू व जकार्ता में बीते बालपन, लॉस एंजलिस व न्यूयॉर्क में व्यतीत कालेज जीवन तथा ८० के दशक में शिकागो शहर में सामुदायिक आयोजक के रूप में उनकी नौकरी के दिनों के संस्मरण हैं। पुस्तक पर आधारित आडियो बुक को २००६ में प्रतिष्ठित ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनकी दूसरी पुस्तक द ओडेसिटी ऑफ़ होप मध्यावधि चुनाव के महज़ तीन हफ्ते पहले अक्तूबर २००६ में प्रकाशित हुई। यह किताब शीघ्र ही सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों की सूची में शामिल हो गई। पुस्तक पर आधारित आडियो बुक को भी २००८ में प्रतिष्ठित ग्रैमी पुरस्कार से नवाजा गया है।[3] शिकागो ट्रिब्यून के अनुसार पुस्तक के प्रचार के दौरान लोगों से मिलने के प्रभाव ने ही ओबामा को राष्ट्रपति पद के चुनाव में उतरने का हौसला दिया।

राष्ट्रपति पद के नामांकन का सफर

५ जून, २००८ को यह लगभग तय हो गया था कि ओबामा की उम्मीदवारी के समर्थन में उनकी डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंदी तथा पूर्व अमेरीकी प्रथम महिला हिलेरी क्लिंटन अपनी दावेदारी छोड़ देंगी।[4]। अमेरीकी इतिहास में ओबामा न केवल पाँचवें अफ्रीकी अमेरिकी सीनेटर (अमेरिकी सांसद) हैं बल्कि लोकप्रिय मतों से चुने जाने वाले तीसरे और सीनेट में नियुक्त एकमात्र अफ्रीकी अमेरीकी सीनेटर भी हैं।

ऐमिनैम




जन्मनाम Marshall Bruce Mathers III
अन्य नाम Slim Shady
जन्म अक्टूबर 17, 1972 (आयु 43 वर्ष)
Saint Joseph, Missouri, U.S.
निवास Detroit, Michigan, U.S.
शैली Hip hop
व्यवसाय Rapper, record producer, actor, songwriter
सक्रिय वर्ष 1995–present
रिकॉर्ड लेबल Mashin' Duck Records
Web Ent.
Interscope Records
Aftermath Ent.
Shady Records
Game Recordings
संबंधित प्रदर्शन D12, Bad Meets Evil, Dr. Dre, 50 Cent
जालस्थल/वेबसाइट www.eminem.com

मार्शल ब्रूस III (जन्म 17 अक्टूबर 1972)[1] अपने स्टेज के नाम एमिनेम से बेहतर जाने जाते हैं वह एक अमेरीकी रैप गायक, रिकार्ड निर्माता, गीतकार और अभिनेता हैं। एमिनेम ने जल्द ही 1999 में अपने प्रमुख-लेबल पहले एलबम द स्लिम शेडी एलपी, जो कि एक उत्तम रैप एलबम है, उसके लिए ग्रेमी पुरुस्कार जीत कर लोकप्रियता हासिल की. अगला एलबम द मार्शल एलपी, इतिहास में सबसे तेज़ी से बिकने वाला हिप हॉप एलबम बन गया।[2] इससे एमिनेम की और उनके रिकार्ड लेबल शेडी रिकार्डस की लोकप्रियता बहुत बढ़ गई और उनकी समूह परियोजना डी 12 को मुख्यधारा में मान्यता मिल गई।

मार्शल एलपी और उनके तीसरे एलबम द एमिनेम शो ने भी ग्रेमी पुरुस्कार जीता, जिससे वह लगातार तीन बेस्ट रैप एलबम जीतने वाले प्रथम कलाकार बन गये। 2002 में उन्होंने 8 माइल फिल्म में लूज़ योअरसेल्फ गीत के लिए मौलिक गीत का अकादमी पुरुस्कार जीता, जिसमे उन्होंने मुख्य भूमिका भी निभाई. "लूज़ योअरसेल्फ" सबसे लंबे समय तक चलने वाला नम्बर 1 हिप हॉप था।[3] 2005 के दौरे के बाद एमिनेम अंतराल पर चले गए। 2004 की एनकॉर के बाद, उन्होंने 15 मई 2009 को रीलेप्स नामक अपना पहला एलबम जारी किया। एमिनेम इस दशक का सबसे अधिक बिकने वाला कलाकार है,[4] और उसने आज तक 80 मिलियन से अधिक एलबम दुनिया भर में बेचे, जिससे कि वह दुनिया में सबसे अधिक बिकने वाला संगीतकार बन गया।[5] एमिनेम, रोलिंग स्टोन पत्रिका द्वारा चुने गये 100 महानतम कलाकारों में से एक हैं।[6] वाईब मैगज़ीन ने भी उन्हें अभी तक का सर्व श्रेष्ठ रैप गायक कहा है।[7]. डी 12 के साथ अपने काम सहित, एमिनेम ने बिलबोर्ड टॉप 200 पर आठ #1 एलबम प्राप्त की हैं और विश्व भर में 12 नंबर एक एकल. दिसम्बर 2009 में बिलबोर्ड पत्रिका ने उन्हें दशक के कलाकार का नाम दिया है। बिलबोर्ड के अनुसार 2000 में सबसे अधिक बिकने वाली पांच एलबम में से दो एमिनेम की है।


प्रारम्भिक जीवन

सेंट जोसफ, मिसूरी में पैदा हुए, वह दिबोरह -ब्रिग्स (नी नेल्सन) और मार्शल ब्रूस मैथर्स जूनियर के बेटे थे।[8] वह स्कोत्लेंड,[9] अँगरेज़ी एंव दूरस्थ स्विस और जर्मन मूल के हैं।[10] उनके जन्म के शीघ्र बाद उनके पिता ने अपने परिवार को छोड़ दिया. 12 वर्ष की आयु तक और उनकी माता मिसूरी के विभिन्न शहरों (जिनमें सेंट जोसफ, सवाना और कंसास) भी शामिल थे)[11] में घूमते रहे. फिर वह वारेन, मिशिगन, डेटरोइट के एक उपनगर चले गए। किशोरावस्था में बीस्टी बोयज़ एल्बम लाईसेंसड टु 11i की एक प्रति प्राप्त करने के बाद, को हिप हॉप में रुची हो गयी। 14 वर्ष की आयु में उन्होंने M&M नाम से शौकिया रैप का प्रदर्शन किया और बास्मिंट प्रोड्क्शन नामक एक समूह में शामिल हो कर स्टेपइन औंन टु द सीन के नाम से एक ई पी (EP) जारी की. बाद में उन्होंने अपना नाम बदल कर "सोल इंटेंट" रख लिया और 1995 के आसपास उन्होंने मशीन 'डक रिकार्डस, रिकार्ड लेबल के तहत अपना पहला एकल "फकिन बैकस्टैबर" जारी किया।[1] हालाँकि उन्होंने वारेन के लिंकान हाई स्कूल में दाखिला लिया था फिर भी यह हिप होप दर्शको के अनुमोदन पर पुरे शहर में,[12] ओस्बोर्न हाई स्कूल में फ्री स्टाईल लड़ाई में भाग लेते थे।[1] तरुअनसी[13] के कारण नौवीं कक्षा दो बार दोहराने के बाद उन्हें 17 साल की आयु में स्कूल से निकाल दिया गया।[8]


संगीत कैरियर

1992-1998: प्रारंभिक कैरियर और इन्फनिट संपादित करें
इन्हें भी देखें: Infinite (Eminem album)
आद्यतः 1992 में जेफ़ और मार्क बास ब्रदर्ज़ द्वारा चलाई गयी FBT प्रोड्क्शन के लिए साइन किये गये। मैथेर्स ने कुछ समय के लिए सैंट क्लैर शौर पर स्थित गिल्बर्ट लौज के रेस्तरां में खाना पकाने और बर्तन साफ़ करने की न्यूनतम वेतन की नौकरी भी की.[14] 1996 में, उनका प्रथम एलबम इन्फनिट जो कि बास ब्रदर्ज़ के रिकार्डिंग स्टूडियो बास्मिंट में रिकार्ड किया गया, उनके स्वतंत्र लेबल वेब एंटरटेनमेंट के तहत जारी किया गया।[15] एमिनेम कहते हैं: "ज़ाहिर है, मैं जवान था और अन्य कलाकारों से प्रभावित था और मुझे कई जगहों से फीडबैक मिल रहा था कि मेरी आवाज़ नास और ए जेड(AZ) की तरह लगती है। इन्फनिट से मैं पता लगाने की कोशिश कर रहा था कि मैं अपना रैप स्टाइल कैसा बनाना चाहता हूँ, मैं माईक पर कैसे अपनी ध्वनी और स्वयम को प्रस्तुत करना चाहता हूँ. यह एक बढ़ता हुआ चरण था। मैंने अनुभव किया कि इन्फनिट' एक डेमो की तरह था, जो बस दब गया हुआ था।"[16] इन्फनिट में आवृत विषयों में, उनकी नवजात बेटी हैली जेड को सीमित धन से पालने का संघर्ष और अमीर होने की प्रबल इच्छा शामिल हैं।[17] अपने कैरियर के शुरुआत में, एमिनेम ने अपने साथी डेटरोइट MC रौयास दा 5'9" के साथ मिल कर बेड मीट्स इवल नामक स्टेज नाम के तहत काम किया।[18] इन्फनिट जारी होने के बाद, एमिनेम के निजी संघर्ष और ड्रग एंव अल्कोहल के कुप्रयोग की वजह से उन्होंने आत्महत्या करने की असफल कोशिश की.[1]

स्लिम शेडी ईपी के जारी होने के साथ मैथेर्स पर अंडरग्राउंड रैपर केज की विषयवस्तु और शैली की नकल करने का आरोप लग गया।[19][20] ईपी का प्रचार करते हुए, ने इन्सेन कलौन पोस्से के सदस्य जोसेफ ब्रूस से सम्पर्क किया और उसे एक प्रचार-पुस्तिका दी, जिसके अनुसार वह समूह ईपी जारी किये जाने की पार्टी में उपस्थित रहेगा. ब्रूस ने आने से इनकार कर दिया क्योंकि मैथेर्स ने पहले उससे उस समूह का नाम उपयोग करने की अनुमति के लिए सम्पर्क नही किया था। ब्रूस की इस प्रतिक्रिया को व्यक्तिगत अपमान के रूप में लेते हुए, ने बाद में रेडियो साक्षात्कारों में उस समूह पर आक्षेप किया।[21][22]

जब एमिनेम ने 1997 की रैप ओलम्पिक में दूसरा स्थान जीता तो इंटरस्कोप रिकार्डस के CEO जिमी लविंग ने एमिनेम को डेमो टेप देने का अनुरोध किया। लविंग ने रिकार्ड प्रोड्यूसर, आफ्टरमाथ एंटरटेनमेंट के संस्थापक डाक्टर ड्रे के लिए वह टेप बजाया. उन दोनों ने एमिनेम की आने वाली प्रमुख-लेबल पहली स्लिम शेडी एलपी के लिए रिकार्डिंग शुरू कर दी और एमिनेम ने किड रोक्स द्वारा निर्मित एलबम डेविल विदाउट अ कॉज़ में एक अतिथि प्रदर्शन किया।[1] हिप-होप पत्रिका द सौर्स ने एमिनेम को अपने "अनसाईन्ड हाईप" कॉलम में चित्रित किया।[23]

1998-1999: द स्लिम शेडी एलपी
मुख्य लेख : The Slim Shady LP
बिलबोर्ड पत्रिका के अनुसार, एमिनेम ने अपने जीवन के इस मोड़ पर "अनुभव किया कि उसकी संगीत महत्वाकांक्षा ही उसको दुखी जीवन से बचाने का एकमात्र तरीका है ." 1998 में आफ्टरमाथ एंटरटेनमेन्ट/इंटरस्कोप रिकार्डस से हस्ताक्षर करने के बाद, एमिनेम ने अपना पहला प्रमुख स्टूडियो एलबम, द स्लिम शेडी एलपी जारी किया, जो डाक्टर ड्रे के निर्माण पर आधारित था। बिलबोर्ड के अनुसार, यह एलबम "कई वर्षों बाद के बारे में थी, जो वह पहले से ही लिख रहा था।"[24][25]यह 1999 के सबसे लोकप्रिय एलबम में से एक बना जो कि वर्ष के अंत तक तीन बार प्लेटिनम में गया। एलबम की लोकप्रियता के साथ ही उसकी धुन के बारे में विवाद आया। "97 बोनी एंड क्लाईड" में उन्होंने अपनी पत्नी के शरीर को निपटाने के बाद, अपनी नाबालिग बेटी के साथ यात्रा का वर्णन किया है। एक अन्य गीत "गिल्टी कोंशिय्स" का अंत उनके, एक आदमी को अपनी पत्नी तथा उसके प्रेमी की हत्या के लिए प्रोत्साहित करने के साथ होता है। "गिल्टी कोंशियास" से डाक्टर ड्रे और एमिनेम के बीच गहरी दोस्ती की शुरुआत हुई. दोनों लेबल-साथियों ने बाद में कई सफल गाने दिए, जिनमें शामिल हैं: डाक्टर ड्रे के एलबम 2001 से "फोरगोट अबाउट ड्रे" और "वाट्स द डिफ़रेंस", द मार्शल एलपी से "बिच प्लीस II", द एमिनेम शो से, "से वट यु से", एन्कोर से "एन्कोर/कर्टन डाउन" और रिप्लेस में से "ओल्ड टाइम्स सेक" और "क्रेक ए बोतल". डाक्टर ड्रे ने आफ्टरमाथ लेबल के अंतर्गत एमिनेम स्टूडियो के सभी एलबम में कम से कम एक अतिथि प्रदर्शन किया है।[26] इस एलबम को रिकार्डिंग एसोसिएशन ऑफ़ अमरीका द्वारा अब चार बार प्लेटिनम प्रमाणित किया गया है। साथ ही दुनिया भर में इसकी नौ मिलियन की बिक्री हुई.

2000-2001: मार्शल एलपी
मुख्य लेख : The Marshall Mathe



जस्टिन बीबर



जन्मनाम जस्टिन ड्रियु बीबर
जन्म मार्च 1, 1994 (आयु 21 वर्ष)[1]
लंदन, ओंटारियो,कनाडा
निवास स्ट्रेटफ़ोर्ड, ओंटारियो, कनाडा
शैली पॉप, आर और बी, टीन पॉप[2][3][4]
व्यवसाय गायक, संगीतकार, अभिनेता
वाद्य यन्त्र आवाज़, गिटार, पियानो, पर्कुशन[5] trumpet[6]
सक्रिय वर्ष 2008–अबतक
रिकॉर्ड लेबल आइलैंड, आरबीएमजी
संबंधित प्रदर्शन अशर
जालस्थल/वेबसाइट justinbiebermusic.com
जस्टिन द्रू बीबर[7] (अंग्रेज़ी: Justin Drew Bieber, जन्म १ मार्च १९९४)[1] एक कनेडियाई पॉप/आर और बी गायक, गीतकार और अभिनेता है।[2][4] बिबर को स्कूटर ब्राउन ने २००८ में खोज निकाला था[8] जिन्होंने उसके वीडियो यूट्यूब पर देखे और आगे चलकर उसके मैनेजर बन गए। ब्राउन ने उनकी मुलाकात अशर से अटलांटा, जोर्जिया में करवाई और बिबर को जल्द ही रेमंड ब्राउन मिडिया समूह में शामिल कर लिया गया जो अशर और ब्राउन का समूह है।[9] बाद में बिबर को आइलैंड रिकॉर्ड्स ने साइन कर लिया जो एल.ए रीड की संपत्ति है।[5] बिबर का पहला गीत "वन टाइम" २००९ में रिलीज़ किया गया और यह कनाडा के शीर्ष दस गीतों में रहा। उनका पहला अल्बम माई वर्ल्ड, जिसे नवंबर २००९ में रिलीज़ किया गया, जल्द ही अमेरिका में प्लैटिनम प्रमाणित रहा। वह पहले कलाकार बन गए जिनके सातों गाने बिलबोर्ड हॉट १०० की सूची में शामिल थे।[10]

बिबर का पहला पूरा स्टूडियो अल्बम माई वर्ल्ड २.० मार्च २०१० में रिलीज़ किया गया। यह कई देशों में शीर्ष दस स्थानों में और अमेरिका में प्लैटिनम प्रमाणित रहा। इसमें विश्वभर का शीर्ष-दस का गीत "बेबी" शामिल था। "बेबी" का संगीत वीडियो यूट्यूब पर अबतक चर्चा का विषय व सर्वाधिक देखा गया वीडयो है।


Sunday, January 31, 2016

अनिल कपूर



अनिल कपूर




जन्म  24 दिसम्बर 1959 (आयु 56 वर्ष)[1]
चेम्बूर मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत
व्यवसाय अभिनेता, निर्माता
सक्रिय वर्ष 1984 – वर्तमान
कद 5 फ़ुट 9 इंच (1.75 मी) [2]
जीवनसाथी सुनीता कपूर
(1984 – वर्तमान)
संतान सोनम कपूर
रिया कपूर
हर्षवर्धन कपूर
माता - पिता सुरिन्द्र कपूर (पिता)
निर्मल (माँ)
रिश्तेदार बोनी कपूर (भाई)
संजय कपूर (भाई)
अर्जुन कपूर (भतीजा)
श्री देवी (भाभी)


फिल्मी सफर

अनिल कपूर ने उमेश मेहरा की फिल्म 'हमारे तुम्हारे' (1979) के साथ एक सहायक अभिनेता की भूमिका में अपने बॉलीवुड के सफर की शुरुआत की। 'हम पाँच' (1980) और 'शक्ति' (1982) के रूप में कुछ मामूली भूमिकाओं के बाद उन्हें 1983 में 'वो सात दिन' में अपनी पहली प्रमुख भूमिका मिली जिसमे उन्होंने एक उत्कृष्ट एवं स्वाभाविक प्रदर्शन किया। कपूर ने बाद में टॉलीवुड में अभिनय करने की कोशिश की और तेलुगू फिल्म 'वम्सावृक्षं' और मणिरत्नम की पहली कन्नड़ फिल्म 'पल्लवी अनुपल्लवी' (१९८३) की। इसके बाद उन्होंने यश चोपड़ा की 'मशाल' में एक बेहतरीन प्रदर्शन किया जहां उन्होंने दिलीप कुमार के साथ अभिनय कौशल दिखाया। 'मेरी जंग' (1985) जैसी फिल्म में न्याय के लिए लड़ रहे एक नाराज युवा वकील की भूमिका की जिसने उन्हें एक परिपक्व अभिनेता के रूप में स्थापित कर दिया। इसके अलावा अनिल कपूर ने 'कर्मा', 'मिस्टर इंडिया', 'तेज़ाब', 'राम लखन' जैसी फिल्में कीं जिन्होंने उन्हें स्टारडम की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।

व्यक्तिगत जीवन

अनिल कपूर जाने माने फिल्म निर्माता सुरेन्द्र कपूर के बेटे हैं। उनका जन्म तिलक नगर मुंबई में हुआ। उनके बड़े भाई बोनी कपूर एक प्रसिद्द निर्माता हैं और उनके छोटे भाई संजय कपूर भी एक अभिनेता हैं। 1984 में उन्होंने सुनीता कपूर से शादी की और उनके तीन बच्चे हैं जिनमे सोनम कपूर भी एक अभिनेत्री है।

Saturday, January 30, 2016

कपिल शर्मा


राष्ट्रीयता भारतीय
व्यवसाय हास्य अभिनेता, कलाकार, उत्पादक तथा गायक।
सक्रिय वर्ष 2001 से अब तक
जालपृष्ठ
(वेबसाइट)

kapilsharma.org
कपिल शर्मा एक भारतीय हास्य अभिनेता हैं ।फरवरी 2013 में, कपिल शर्मा फोर्ब्स इंडिया पत्रिकाओं में शीर्ष 100 हस्तियों के बीच में चुने गए थे और वह उस सूची में 96 वें स्थान पर थे।[1][2] अनिल कपूर ने कपिल शर्मा को अपनी फिल्म मे एक भूमिका भी दी थी। वे जल्द ही अनीस बज़मी की चलचित्र(फ़िल्म) " इट्स माय लाइफ " , अब्बास मस्तान की किस किसको प्यार करूँ व करन जौहर की फ़िल्म में भी नज़र आ सकते हैं। वह एक बहुमुखी गायक भी माने जाते हैं। वह उनके चुटकुले कृत्रिम सामाजिक निर्माणों को ही निशाना बनाते हैं।[3] कॉमेडी नाइट्स विद कपिल एक भारतीय हास्य शो है, जो कलर्स टीवी चैनेल पर प्रसारित किया जाता है। इस शो के मेज़बान हास्य अभिनेता कपिल शर्मा हैं। यह शो एक अंग्रेज़ी चैनेल "कुमार्स एट न° 42" के समान बनाया गया है।[4]

पहले का जीवन

कपिल शर्मा का जन्म अमृतसर , पंजाब, भारत में हुआ था। इनके पिता पुलिस डिपार्टमेंट में हेड कांस्टेबल थे और माँ जनक रानी एक गृहणी है।[5] कपिल ने एक स्थानीय (लोकल) पीसीओ से काम करना शुरू किया। इन्होंने अपनी पढाई हिन्दू कॉलेज ,अमृतसर से की है।[6]

करियर

कपिल ने एमएच वन पर हसदे हसांदे रहो कॉमेडी शो में काम किया इसके बाद इन्हें द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज में अपना पहला ब्रेक मिला। ये उन नौ रियलिटी टीवी शो में से एक है जिनको ये जीत चुके हैं।[6]2007 में ये इस शो के विजेता बने जिसमे इन्होंने 10 लाख की पुरस्कार राशि जीती।[7] इसके बाद इन्होंने सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर कॉमेडी सर्कस में भाग लिया।[8] कपिल ने इसके सारे छः सीजन जीते।[9] ये डांस रियलिटी शो झलक दिख लाजा सीजन 6 होस्ट भी कर चुके हैं।[10]और इन्होंने कॉमेडी शो छोटे मियां भी होस्ट किया।[11][12]शर्मा ने उस्तादों के उस्ताद नामक शो में भी हिस्सा लिया।

2013 में शर्मा ने अपने प्रोडक्शन बैनर के9 प्रोडक्शन के अंतर्गत अपना शो कॉमेडी नाइट्स विद कपिल लांच किया जो एक बहुत बड़ा हिट साबित हुआ।[13]कॉमेडी नाइट्स विद कपिल भारत का सबसे प्रसिद्ध कॉमेडी शो है।[14]

सीएनएन-आईबीएन इंडियन ऑफ़ द इयर अवार्ड्स में शर्मा को एंटरटेनर ऑफ़ द इयर अवार्ड 2013 से अमोल पालेकर द्वारा सम्मानित किया गया।[15]

लोक सभा चुनाव 2014 में इन्हें दिल्ली चुनाव आयोग के द्वारा दिल्ली का ब्रांड अम्बेसेडर बनाया गया।[16]

शर्मा ने 60वे फ़िल्म फेयर अवार्ड को करन जौहर के साथ को-होस्ट के रूप में होस्ट किया। [17] सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग 2014के चौथे सीजन में ये एक प्रेसेंटर थे।[18]ये बैंक चोर नामक यशराज फिल्म्स की फ़िल्म से अपना फिल्मिंग डेब्यू करने वाले थे लेकिन बाद में इन्होंने ये फ़िल्म छोड़ दी।[19]17 अगस्त को कौन बनेगा करोड़पति के 8वे सीजन के पहले एपिसोड में इन्हें अतिथि के रूप में बुलाया गया।[20]ये अपना फ़िल्म डेब्यू लीड के तौर पर अब्बास-मस्तान द्वारा निर्देशित फ़िल्म किस किसको प्यार करूँ से करेंगे , जिसमें इनके अपोजिट अनेक हेरोइसन्स हैं।[21]

व्यंग्य शैली
इनकी व्यंग्य शैली हाज़िर जवाब और आशु-विनोद की है, यानि जो अवस्था हो उसी स्थान पर उसी संदर्भ में कोई मज़ाक करना । इनके विनोद में अश्लील शब्दों का प्रयोग कम होता है । कुछ चीज़े जो इनके व्यंग्य में बारंबार आई हैं -

निर्जीव वस्तुओं का आपसी संबंध निकालना - जैसे तबले, गिटार इत्यादि के छोटे आकार से उनको बेबी कहना; उम्र के साथ हारमोनियम का बड़ा होना ।
दर्ज़े से एकदम अलग बातें - किसी मध्यम सुन्दर को जेनिफ़र लोपेज कहना, या सलमान खान जैसे कालाकारों को "वो लड़का, क्या नाम है उसका.." ।
बाप को मतलबी कहना - कभी पथरी के लिए डॉक्टर बनाना तो कभी वकील ।
साथी कलाकारों के योगदान को कम कहना - कईयों को "मूड में आओ" जैसे शब्द कहना ।
गाने का माहौल श्स्तरीय बनाकर चालू गाने गाना । कई बार - तुनक तुन तुन .., क्या अदा क्या जलवे तेरे पारो .. आदि ।
जज की ख्याति को उलटकर पेश करना - अर्चना को मर्द और शेखर जी को गायक ।
निजी जीवन संपादित करें

शर्मा मुम्बई में रहते हैं । इनकी अभी शादी नहीं हुई है।[22]

ये एक पशु प्रेमी हैं और ये जीवों के साथ मानवीय व्यवहार का समर्थन करते हैं। इन्होंने एक सेवानिवृत्त और छोड़े गए कुत्ते ज़ंजीर को गोद लिया है।[23]

फिल्मोग्राफी

टेलीविज़न
2007 द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज 3 (स्वयं)
2011-12 स्टार या रॉकस्टार (स्वयं)
2010-13 कॉमेडी सर्कस (स्वयं)
2013 झलक दिख ला जा 6 (होस्ट)
2013–वर्तमान कॉमेडी नाइट्स विद कपिल (स्वयं)
2014 कौन बनेगा करोड़पति 8 (अतिथि)
फ़िल्म
2015 किस किसको प्यार करूँ

सलमान ख़ान


जन्म अब्दुल रशीद सलीम सलमान खान
27 दिसम्बर 1965 (आयु 50 वर्ष)
इन्दौर, मध्य प्रदेश, भारत
रहवास बांद्रा, मुम्बई
अन्य नाम सल्लू
व्यवसाय अभिनेता
सक्रिय वर्ष १९८८ - वर्तमान
अब्दुल रशीद सलीम सलमान खान (उर्दू: سلمان خان उच्चारण : səlmɑːn xɑːn, जन्म : २७ दिसम्बर १९६५) एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता हैं, जो बॉलीवुड की फिल्मों में दिखाई देते हैं। इन्होंने सन १९८८ में अभिनय की दुनिया में अपनी पहली फिल्म बीवी हो तो ऐसी से शुरूआत की। सलमान को अपनी पहली बड़ी व्यावसायिक सफलता १९८९ में रिलीज़ हुई मैंने प्यार किया से मिली, जिसके लिए इन्हें फिल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ नवीन पुरूष अभिनेता पुरस्कार भी दिया गया। वे बॉलीवुड की कुछ सफल फिल्मों में स्टार कलाकार की भूमिका करते रहे, जैसे साजन (१९९१), हम आपके हैं कौन (१९९४) व बीवी नं. १ (१९९९) और ये ऐसी फिल्में थीं जिन्होंने उनके करियर में पांच अलग सालों में सबसे अधिक कमाई की।

१९९९ में खान ने १९९८ में कुछ कुछ होता है में उनकी अतिथि-भूमिका के लिए फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार जीता और तबसे इन्होंने कई आलोचनात्मक और व्यावसायिक फिल्मों में स्टार के रूप में सफलता प्राप्त की हैं, जिनमें हम दिल दे चुके सनम (१९९९), तेरे नाम(२००३), नो एन्ट्री (२००५) और पार्टनर (२००७) शामिल हैं। इस तरह खान ने खुद को हिंदी सिनेमा[1][2] के प्रमुख अभिनेताओं में सबसे महान अभिनेता की छवि बनाई। बाद में बनी फ़िल्में, वांटेड (२००९), दबंग (२०१०), रेडी (२०११) और बॉडीगार्ड (२०११) उनकी हिन्दी सिने जगत में सर्वाधिक कमाई वाली फ़िल्में रही। किक (२०१४ फिल्म) सलमान की पहली फिल्म है जो 200 करोड़ के क्लब में शामिल हुई है। किक सलमान की सातवीं फिल्म है जो 100 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस कर चुकी है। इससे पहले 6 फिल्में 100 करोड़ क्लब में शामिल हो चुकी है। एक था टाइगर - 198 करोड़, दबंग-2 - 158 करोड़, बॉडीगार्ड - 142 करोड़, दबंग - 145 करोड़, Ready (2011 film) - 120 करोड़, जय हो (फ़िल्म) - 111 करोड़ है।[3]
शुरूआती जीवन

खान कथानककार सलीम ख़ान और उनकी पहली पत्नी (प्रथम नाम सुशीला चरक) सलमा के ज्येष्ठ पुत्र है। उनके दादा अफगानिस्तान से आकार भारत में मध्य प्रदेश में बस गए थे। उनकी माँ मराठी हिंदू है।[4] खान ने एक दफ़ा खुद भी कहा है की वे आधे हिंदू व आधे मुस्लिम है।[5] उसकी सौतेली माँ हेलेन, एक पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री है जिन्होंने उनके साथ कुछ फ़िल्मों में साथ काम किया था। उनके दो भाई अरबाज़ ख़ान और शोहेल ख़ान है व बहनें अलवीरा और अर्पिता है। अलवीरा की शादी अभिनेता/निर्देशक अतुल अग्निहोत्री से हो चुकी है। खान ने अपने भाइयों अरबाज़ व शोहेल की ही तरह बांद्रा स्थित सेंट स्टेनिस्लॉस हाई स्कूल के माध्यम से अपनी स्कूली शिक्षा समाप्त की। इससे पहले, उन्होंने ग्वालियर स्थित सिंधिया स्कूल में अपने छोटे भाई अरबाज़ से साथ कुछ वर्ष पढ़ाई की।[6][7]

करियर

१९८० में संपादित करें
सलमान खान ने अपने अभिनय की शुरुआत १९८८ में फिल्म बीवी हो तो ऐसी से की जहां उन्होंने सहायक कलाकार की भूमिका निभाई है। बॉलीवुड फिल्म में उनकी पहली प्रमुख भूमिका सूरज आर. बड़जात्या की रोमांस फिल्म मैनें प्यार किया (1989) में थी। यह फिल्म भारत की सर्वाधिक कमाई वाली फिल्मों से एक फिल्म बन गई।[8] इस फिल्म को के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर का सर्वश्रेष्ठ नए अभिनेता का पुरस्कार मिला व फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार के लिए नामांकन भी प्राप्त हुआ।

१९९० में संपादित करें
१९९० में खान की केवल एक फ़िल्म रिलीज़ की गई जिसका नाम था बागी: अ रिबेल फॉर लव। इसमें दक्षिण भारत की अभिनेत्री नग़मा मुख्य भूमिका में थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी और[9]इसके बाद वर्ष १९९१ इनके लिए सफल वर्ष साबित हुआ जब इन्होंने लगातार तीन सफल हिट फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई जिनमे ' शामिल है।[10]प्रारंभ में ही बॉक्स ऑफिस पर इन फिल्मों की जबरदस्त सफलता के बावजूद १९९२-१९९३ में रिलीज हुई इनकी तमाम फिल्में असफल रही।[10]

सूरज बड़जात्या के निर्देशन में दूसरी बार सहयोग करने से रोमांस फिल्म हम आपके हैं कौन में सह कलाकार माधुरी दीक्षित के साथ खान ने १९९४ में अपनी पहली सफलता का इतिहास पुन: दोहराया। उस साल की यह सबसे बड़ी हिट फिल्म थी और बॉलीवुड में सबसे व्यावसायिक सफलता के बावजूद इस फिल्म को दूर दूर से प्रशंसा मिलती रही और खान को भी उनके प्रदर्शन की तारीफ मिली जिसके चलते उन्हें दूसरी बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार के लिए नामांकन मिला। उस वर्ष खान की भूमिका वाली तीन और फिल्में रिलीज हुई लेकिन किसी ने भी इतनी सफलता नहीं दिलाई जितनी कि पहली वाली फिलम ने दिलाई थी। हालांकि सह कलाकार आमिर ख़ान के साथ इनकी फिल्म अंदाज अपना अपनाके रिलीज होने के बाद से ही इनके प्रदर्शन के लिए इन्हें प्रशंसा मिल गई थी। १९९५ में इन्होंने राकेश रोशन की ब्लॉकबस्टर फिल्म करण अर्जुन से अपनी सफलता को मजबूत किया जिसमें शाहरुख़ ख़ान[10] इनके सह कलाकार थे। यह फिल्म वर्ष की दूसरी सबसे बड़ी हिट फिल्म और इसमें करन की भूमिका ने उसके नाम को एक बार फिर फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए नामित कर दिया गया जिसमें करन अर्जुन के सह कलाकार शाहरूख खान को यह पुरस्कार दे दिया गया था।

१९९६ के बाद दो सफल फिल्में दी हैं। इनमें से पहली संजय लीला भंसाली की दिशात्मक शुरूआतख़ामोशी: द म्यूज़िकल, थी जिसमें सह कलाकार के रूप में मनीषा कोइराला, नाना पाटेकर और सीमा बिस्वास थीं। हालांकि यह बॉक्स ऑफिस पर असफल रही फिर भी समीक्षकों द्वारा सराही गई थी। इनकी अगली सफलता सनी देओल और करिश्मा कपूर के साथ राज कंवर की एक्शन हिट फिल्म जीत से रही। १९९७ में इनकी दो फिल्में जुड़वां और औजार रिलीज़ हुई। पहली वाली फिल्म डेविड धवन के निर्देशन वाली एक हास्य फिल्म थी जिसमें जन्म के समय बिछुड़ जाने के कारण दोहरी भूमिका निभाई थी।

खान ने १९९८ में पांच अलग अलग फिल्मों में काम किया जिसमें उनकी पहली रिलीज प्यार किया तो डरना क्या वर्ष की सबे बड़ी सफल फिल्म साबित हुई इसमें इनकी सह कलाकार काजोल थीं। इसके बाद साधारण सी सफलता दिलाने वाली इनकी फिल्म जब प्यार किसी से होता है[10] आई। खान ने उस युवा पुरूष की भूमिका निभाई थी, जिसे ऐसे बच्चे को संरक्षण में रखना है, जो उसका बेटा होने का दावा करता है। इस फिल्म में खान का प्रदर्शन उनके लिए कई सकारात्मक सूचना एवं उनके आलाचकों से इनके पक्ष में खबरें लेकर आया। वे करन जौहर के निर्देशन वाली पहली फिल्म कुछ कुछ होता है के ही चक्कर काटते रहे। शाहरूख खान और काजोल के साथ सह कलाकार के रूप में इन्होंने केवल अमन की भूमिका करने वाले केमियो तक ही बढ़ पाए। लेकिन, यह उसके लिए फायदेमंद सिद्ध हुई क्योंकि उनके प्रदर्शन ने उन्हें दूसरी ब



अक्षय कुमार



जन्म नाम राजीव हरी ओम भाटिया
जन्म सितम्बर 9, 1967 (आयु 48 वर्ष)
अमृतसर, भारत
व्यवसाय फिल्म अभिनेता
कार्यकाल १९९१ – वर्तमान
जीवनसाथी ट्विंकल खन्ना (२००१ – वर्तमान)
पुरस्कार और सम्मान
फिल्मफेयर पुरस्कार
सर्वश्रेष्ठ खलनायक
२००२ अज़नबी
सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता
२००५ गरम मसाला
अक्षय कुमार (पंजाबी: ਅਕਸ਼ੈ ਕੁਮਾਰ, जन्म: राजीव हरी ओम भाटिया, ९ सितम्बर, १९६७) एक भारतीय बॉलीवुड फ़िल्म अभिनेता हैं। वे 100 से अधिक हिन्दी फिल्मों में काम कर चुके हैं।

90 के दशक में,[1] हिट एक्शन फिल्मों जैसे खिलाड़ी (१९९२), मोहरा (१९९४) और सबसे बड़ा खिलाड़ी (१९९५) में अभिनय करने के कारण, कुमार को बॉलीवुड का एक्शन हीरो की संज्ञा दी जाती थी और विशेषतः वे "खिलाड़ी श्रृंखला" के लिए जाने जाते थे। फिर भी, वह रोमांटिक फिल्मों जैसे ये दिल्लगी (१९९४) और धड़कन (२०००) में अपने अभिनय के लिए सम्मानित किए गए और साथ ही साथ ड्रामेटिक फिल्मों जैसे एक रिश्ता (२००१) में अपनी अभिनय क्षमता को दिखाया। २००२ में वे अपना पहला फ़िल्मफेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ खलनायक के रूप में फ़िल्म अजनबी (2001) में अपने अभिनय के लिए। अपनी एक सी छवि को बदलने के इच्छुक अक्षय कुमार ने ज्यादातर कोमेडी फिल्में की।[1] फ़िल्म हेरा फेरी (2002), मुझसे शादी करोगी (2004), गरम मसाला (2005) और जान-ए-मन (२००६) में हास्य अभिनय के लिए फ़िल्म समीक्षकों द्वारा उनकी प्रशंसा की गई। 2007 में वे सफलता की उचाईयों को छुने लगे, जब उनके द्वारा अभिनीत चार लगातार कामर्सियल फिल्में हिट हुई।इस तरह से, वे अपने आपको हिन्दी फ़िल्म उद्योग में एक प्रमुख अभिनेता के रूप में स्थापित किया।[2]

प्रारंभिक जीवन

राजीव हरी ओम भाटिया का जन्म अमृतसर के एक मध्यम वर्गीय पंजाबी परिवार में हुआ।[3] उसके पिता एक सरकारी कर्मचारी थे। बहुत ही छोटी उम्र से ही, वे एक कलाकार के रूप में जाने गए, विशेषतः एक नर्तक के रूप में। मुंबई आने से पहले, कुमार दिल्ली के चाँदनी चौक में एक पड़ोसी के घर पले-बढ़े।[4] मुंबई में, वे कोलीवाड़ा में रहते थे जो एक पंजाबी बहुल क्षेत्र था।[4] वे डोन बोस्को विद्यालय में पढ़ाई किए और फिर खालसा कॉलेज में, जहाँ उन्होंने खेल में अपनी रुचि दिखाई।[4]

वे मार्शल आर्ट्स (सामरिक कला) की शिक्षा बेंगकोक में प्राप्त किया और वहां एक रसोइया की नौकरी भी करते थे। वे फिर मुंबई वापस आ गए, जहाँ वे मार्सल आर्ट्स की शिक्षा देने लगे।उनका एक विद्यार्थी जो एक फोटोग्राफर था और उन्हें मॉडलिंग करने कहा।उस विद्यार्थी ने उन्हें एक छोटी कंपनी में एक मॉडलिंग असयांमेंट दिया। उन्हें कैमरे के सामने पोज देने के लिए, दो घंटे के 5,000 रुपये मिलते थे, पहले की तनख्वाह 4000 रुपये प्रति महीने की तुलना में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारण था कि वे क्यों मॉडल बने। मॉडलिंग करने के दो महीने बाद, कुमार को प्रमोद चक्रवर्ती ने अंततः अपनी फ़िल्म दीदार में अभिनय करने का मौका दिया।[4]

करियर

कुमार बॉलीवुड में अभिनय की शुरूआत 1991 की फ़िल्मसौगंध से की, जो सराहा नहीं गया। उनकी पहली प्रमुख हिट 1992 की थ्रिलर फ़िल्म खिलाड़ी थी। 1993 का वर्ष उनके लिए अच्छा नहीं रहा क्योंकि उनकी अधिकतर फ़िल्म फ्लॉप हो गई। फ़िर भी, 1994 का वर्ष कुमार के लिए बेहतरीन वर्ष रहा जिसमें खिलाड़ी के साथ मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी और मोहरा जो साल का सर्वाधिक सफल फिल्मों में से था।[5] बाद में, यश चोपड़ा ने उन्हें रोमांटिक फ़िल्म ये दिल्लगी में लिया जो एक सफल फ़िल्म थी।[5] उन्हें इस फ़िल्म के लिए सराहना मिली, जिसमें वे एक रोमांटिक किरदार में थे जो बहुत ही अलग था उनके एक्शन किरदार से।उन्हें फ़िल्मफेयर और स्टार स्क्रीन उत्सवों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए पहला नोमिनेशन मिला।ये सारी उपलब्धियां, कुमार को उस साल का सफलतम अभिनेता बना दिया।[6]

1995 में, अपनी सफल फिल्मों के साथ, वे खिलाड़ी श्रेणी के तीसरी फ़िल्म सबसे बड़ा खिलाड़ी में अभिनय किया, जो एक हिट थी।[7] वे खिलाड़ी श्रेणी के सभी फिल्मों में सफल रहे और फ़िर बाद के वर्ष में खिलाड़ी टायटल के साथ फ़िल्म खिलाड़ियों के खिलाड़ी में अभिनय किया जिसमें उनके साथ रेखा और रवीना टंडन थी। यह फ़िल्म उस साल का सर्वाधिक सफल फ़िल्म रही।[8]

1997 में, यश चोपड़ा की हिट फ़िल्म दिल तो पागल है में मेहमान कलाकार की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार में नामांकन हुआ। उसी साल, वे खिलाड़ी श्रेणी के पांचवें फ़िल्म मिस्टर एंड मिसेज़ खिलाड़ी में हास्य भूमिका में नजर आए।खिलाड़ी टायटल के साथ उनकी पिछली फिल्मों की तरह, यह फ़िल्म हिट हुई।[9] और इस तरह इस फ़िल्म की तरह, उनका अगला खिलाड़ी नाम से रिलीज सारी फिल्में आने वाले साल में बॉक्स ऑफिस पर हिट होते चला गया। 1999 में, कुमार को फ़िल्म संघर्ष' और जानवर में उनके किरदार के लिए अच्छी सराहना मिली।जबकि पहली फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल हौ सकी, पर बाद में उन्हें सफलता मिली।[10]

2000 में हास्य फ़िल्म हेरा फेरी में अभिनय किया जो हर लिहाज से सफल रही,[11] और इस फ़िल्म में उन्होंने अपने आपको एक एक्शन और रोमांटिक भूमिकाओं की तरह एक सफल हास्य रोल भी अच्छी तरह निभाया।उन्होंने रोमांटिक फ़िल्म धड़कन में भी काम किया और बाद में उसी साल उसे काफ़ी सफलता मिली।[11] 2001 में, फ़िल्म अजनबी में कुमार ने एक नकारात्मक किरदार निभाया। उनकी फ़िल्म को काफी सराहा गया तथा बेस्ट विलेन के लिए पहला फ़िल्मफेयर पुरस्कार मिला।

हेरा फेरी की सफलता के बाद अक्षय कुमार ने कई हास्य फिल्मों में काम किया, जिनमें शामिल हैं आवारा पागल दीवाना (2002), मुझसे शादी करोगी (2004) और गरम मसाला (2005)। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर बेहद सफल रही और उनके अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ हास्य कलाकार का दूसरा फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।[12][13]

अपनी एक्शन, हास्य और रोमांटिक भूमिकाओं के अलावा कुमार ने ड्रामाई रोल भी बखूबी निभाये जैसे कि एक रिश्ता (2001), आँखें (2002), बेवफा (2005) और वक्त (2005)।

२००६ में वे हेरा फेरी टायटल से बनी दूसरी फ़िल्म फ़िर हेरा फेरी में अभिनय किया। पिछले फ़िल्म की तरह, यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस में सफल हुई।[14] बाद में उसी वर्ष सलमान ख़ान के साथ रोमांटिक संगीत फ़िल्म जान-ए-मन में अभिनय किया। इस फ़िल्म का बेसब्री से इंतजार था और आलोचकों से अच्छा रिव्यू मिलने के बावजूद यह बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सक

Friday, January 29, 2016

शाहरुख़ ख़ान

              शााहरूख़ खान


जन्म 2 नवम्बर 1965 (आयु 50 वर्ष)
नई दिल्ली, भारत
रहवास मुंबई, महाराष्ट्र, भारत[1]
व्यवसाय अभिनेता, निर्माता, टेलिविज़न मेज़बान
सक्रिय वर्ष 1988—अबतक
जीवनसंगी गौरी खान (1991—अबतक)
संतान 3
शाहरुख़ ख़ान (उच्चारण [‘ʃaːɦrəx ˈxaːn]; जन्म 2 नवम्बर 1965), जिन्हें अक्सर शाहरुख खान के रूप में श्रेय दिया जाता है और अनौपचारिक रूप में एसआरके नाम से सन्दर्भित किया जाता, एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता है। अक्सर मीडिया में इन्हें "बॉलीवुड का बादशाह", "किंग खान", "रोमांस किंग" और किंग ऑफ़ बॉलीवुड नामों से पुकारा जाता है। खान ने रोमैंटिक नाटकों से लेकर ऐक्शन थ्रिलर जैसी शैलियों में 75 हिन्दी फ़िल्मों में अभिनय किया है।[2][3][4][5] फिल्म उद्योग में उनके योगदान के लिये उन्होंने तीस नामांकनों में से चौदह फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते हैं। वे और दिलीप कुमार ही ऐसे दो अभिनेता हैं जिन्होंने साथ फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार आठ बार जीता है। 2005 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय सिनेमा के प्रति उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया।

अर्थशास्त्र में उपाधी ग्रहण करने के बाद इन्होने अपने करियर की शुरुआत १९८० में रंगमंचों व कई टेलिविज़न धारावाहिकों से की और १९९२ में व्यापारिक दृष्टी से सफल फ़िल्म दीवाना से फ़िल्म क्षेत्र में कदम रखा। इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर प्रथम अभिनय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके पश्च्यात उन्होंने कई फ़िल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं अदा की जिनमे डर (१९९३), बाज़ीगर (१९९३) और अंजाम (१९९४) शामिल है। वे कई प्रकार की भूमिकाओं में दिखे व भिन्न-भिन्न प्रकार की फ़िल्मों में कार्य किया जिनमे रोमांस फ़िल्में, हास्य फ़िल्में, खेल फ़िल्में व ऐतिहासिक ड्रामा शामिल है।

उनके द्वारा अभिनीत ग्यारह फ़िल्मों ने विश्वभर में  १ बिलियन का व्यवसाय किया है। खान की कुछ फ़िल्में जैसे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (१९९५), कुछ कुछ होता है (१९९८), देवदास (२००२), चक दे! इंडिया (२००७), ओम शांति ओम (२००७), रब ने बना दी जोड़ी (२००८) और रा.वन (२०११) अबतक की सबसे बड़ी हीट फ़िल्मों में रही है और कभी खुशी कभी ग़म (२००१), कल हो ना हो (२००३), वीर ज़ारा (२००६)।

वेल्थ रिसर्च फर्म वैल्थ एक्स के मुताबिक किंग खान पहले सबसे आमिर भारतीय अभिनेता बन गए हैं। फर्म ने अभिनेता की कुल संपत्ति 3660 करोड़ रूपए आंकी है।


प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा for Reeten soni संपादित करें
ख़ान के माता पिता पठान मूल के थे|[7][8][9] उनके पिता ताज मोहम्मद ख़ान एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी माँ लतीफ़ा फ़ातिमा मेजर जनरल शाहनवाज़ ख़ान की पुत्री थी|[10]

ख़ान के पिता हिंदुस्तान के विभाजन से पहले पेशावर के किस्सा कहानी बाज़ार से दिल्ली आए थे,[11] हालांकि उनकी माँ रावलपिंडी से आयीं थी|[12] ख़ान की एक बहन भी हैं जिनका नाम है शहनाज़ और जिन्हें प्यार से लालारुख बुलाते हैं|[13][14] ख़ान ने अपनी स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलम्बा स्कूल से की जहाँ वह क्रीड़ा क्षेत्र, शैक्षिक जीवन और नाट्य कला में निपुण थे| स्कूल की तरफ़ से उन्हें "स्वोर्ड ऑफ़ ऑनर" से नवाज़ा गया जो प्रत्येक वर्ष सबसे काबिल और होनहार विद्यार्थी एवं खिलाड़ी को दिया जाता था| इसके उपरांत उन्होंने हंसराज कॉलेज से अर्थशास्त्र की डिग्री एवं जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की मास्टर्स डिग्री हासिल की|[15]


अपने माता पिता के देहांत के उपरांत ख़ान १९९१ में दिल्ली से मुम्बई आ गए| १९९१ में उनका विवाह गौरी ख़ान के साथ हिंदू रीति रिवाज़ों से हुआ|[16] उनकी तीन संतान हैं - एक पुत्र आर्यन (जन्म १९९७) और एक पुत्री सुहाना (जन्म २०००)|व पुत्र अब्राहम।

अभिनय संपादित करें
ख़ान ने अभिनय की शिक्षा प्रसिद्द रंगमंच निर्देशक बैरी जॉन से दिल्ली के थियेटर एक्शन ग्रुप में ली| वर्ष २००७ में जॉन ने अपने पुराने शिष्य के बारे में कहा,

" The credit for the phenomenally successful development and management of Shah Rukh's career goes to the superstar himself."(अनुवाद - शाह रूख़ के कैरियर की असाधारण सफलता का सारा श्रेय उस ही को जाता है|)[17]

ख़ान ने अपना कैरियर १९८८ में दूरदर्शन के धारावाहिक "फ़ौजी" से प्रारम्भ किया जिसमे उन्होंने कोमान्डो अभिमन्यु राय का किरदार अदा किया|[18] उसके उपरांत उन्होंने और कई धारावाहिकों में अभिनय किया जिनमे प्रमुख था १९८९ का "सर्कस"[19], जिसमे सर्कस में काम करने वाले व्यक्तियों के जीवन का वर्णन किया गया था और जो अज़ीज़ मिर्ज़ा द्वारा निर्देशित था| उस ही वर्ष उन्होंने अरुंधति राय द्वारा लिखित अंग्रेज़ी फ़िल्म "इन विच एनी गिव्स इट दोज़ वंस" में एक छोटा किरदार निभाया| यह फ़िल्म दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थी जीवन पर आधारित थी|



अपने माता पिता की मृत्यु के उपरांत १९९१ में ख़ान नई दिल्ली से मुम्बई आ गये| बॉलीवुड में उनका प्रथम अभिनय "दीवाना" फ़िल्म में हुआ जो बॉक्स ऑफिस पर सफल घोषित हुई|[20] इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर की तरफ़ से सर्वश्रेष्ठ प्रथम अभिनय का अवार्ड मिला| उनकी अगली फ़िल्म थी "माया मेमसाब" जो नही चली| १९९३ की हिट फ़िल्म "बाज़ीगर" में एक हत्यारे का किरदार निभाने के लिए उन्हें अपना पहला फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला| उस ही वर्ष में फ़िल्म "डर" में इश्क़ के जूनून में पागल आशिक़ का किरदार अदा करने के लिए उन्हें सरहाया गया| इस वर्ष में फ़िल्म "कभी हाँ कभी ना" के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर समीक्षक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरूस्कार से भी सम्मानित किया गया| १९९४ में ख़ान ने फ़िल्म "अंजाम" में एक बार फिर जुनूनी एवं मनोरोगी आशिक़ की भूमिका निभाई और इसके लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरूस्कार भी प्राप्त हुआ|

१९९५ में उन्होंने आदित्य चोपड़ा की पहली फ़िल्म "दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे" में मुख्य भूमिका निभाई| यह फ़िल्म बॉलीवुड के इतिहास की सबसे सफल और बड़ी फिल्मों में से एक मानी जाती है| मुम्बई के कुछ सिनेमा घरों में यह १२ सालों से चल रही है|[21][22] इस फ़िल्म के लिए उन्हें एक बार फिर फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार हासिल हुआ|

१९९६ उनके लिए एक निराशाजनक साल रहा क्यूंकि उसमे उनकी सारी फिल्में असफल रहीं|[23] १९९७ में उन्होंने यश चोपड़ा की दिल तो पागल है, सुभाष घई की परदेश और अज़ीज़ मिर्ज़ा की येस बॉस जैसी फिल्मों के साथ सफलता के क्षेत्र में फिर कदम रखा|[24]

वर्ष १९९८ में करण जोहर की बतौर निर्देशक पहली फ़िल्म कुछ कुछ होता है उस साल की सबसे बड़ी हिट घोषित हुई और ख़ान को चौथी बार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार हासिल हुआ। इसी साल उन्हें मणि रत्नम की फ़िल्म दिल से में अपने अभिनय के लिए फ़िल्म समीक्षकों से काफ़ी तारीफ़ मिली और यह फ़िल्म भारत के बाहर काफ़ी सफल रही।[25]

अगला वर्ष उनके लिए कुछ ख़ास लाभकारी नही रहा क्यूंकि उनकी एक मात्र फ़िल्म, बादशाह, का प्रदर्शन स्मरणीय नही रहा और वह औसत व्यापार ही कर पायी|[26] सन २००० में आदित्य चोपड़ा की मोहब्बतें में उनके किरदार को समीक्षकों से बहुत प्रशंसा मिली और इस फ़िल्म के लिए उन्हें अपना दू


वर्ष फ़िल्म चरित्र टिप्पणी
1992 दीवाना राजा सहाई
चमत्कार सुंदर श्रीवास्तव
राजू बन गया जेंटलमैन राजू (राज माथुर)
दिल आशना है करण
1993 माया मेमसाब ललित
किंग अन्कल अनिल
बाज़ीगर अजय शर्मा/विकी मल्होत्रा
डर राहुल मेहरा
1994 कभी हाँ कभी ना सुनील
अंजाम विजय अग्निहोत्री
1995 दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे राज मलहोत्रा
ओह डार्लिंग ! ये है इंडिया हीरो
रामजाने रामजाने
त्रिमूर्ति रोमी सिंह
करण अर्जुन अर्जुन
ज़माना दीवाना राहुल मल्होत्रा
गुड्डू गुड्डू बहादुर
1997 दिल तो पागल है राहुल
परदेश अर्जुन सागर
1998 कुछ कुछ होता है राहुल खन्ना
दिल से अमरकांत वर्मा
2000 मोहब्बतें राज आर्यन
2001 अशोका अशोक
कभी खुशी कभी ग़म राहुल रायचंद
2002 देवदास देवदास मुखर्जी
2003 कल हो ना हो अमन माथुर
चलते चलते राज माथुर
2004 स्वदेश मोहन भार्गव
वीर जारा वीर प्रताप सिह
मैं हूँ ना राम शर्मा
2005 पहेली किशनलाल
2006 कभी अलविदा ना कहना देव सरन
डॉन विजय, डॉन
2007 चक दे इन्डिया कबीर खान
ओम शान्ति ओम ओम प्रकाश माखीजा, ओम कपूर
2008 रब ने बना दी जोडी सुरिन्दर साहनी, राज
2009 बिल्लू सुपरस्टार साहिर खान
लक बाय चांस
2010 दूल्हा मिल गया पवन राज गाँधी
माई नेम इज़ ख़ान रिज़वान ख़ान
2011 रा.वन जी.वन
डॉन २ डॉन
2012 जब तक है जान समर आनंद
2013 चेन्नई एक्सप्रेस (२०१३ फ़िल्म) राहुल
2014 हैप्पी न्यू ईयर चार्ली
2015 दिलवाले काली }
नामांकन और पुरस्कारसंपादित करें
2011 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - माई नेम इज़ ख़ान
2007 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - चक दे! इंडिया
2005 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - स्वदेश
2003 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - देवदास
1999 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - कुछ कुछ होता है
1998 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - दिल तो पागल है
1996 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे
1994 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - बाज़ीगर




Monday, January 25, 2016

अशोक बिन्दुसार मौर्य

राजकाल ३०४ ईसा पूर्व से २३२ ईसा पूर्व
राज्याभिषेक २७० ईसा पूर्व
जन्म ३०४ ईसा पूर्व
पाटलिपुत्र, पटना
मृत्यु २३२ ईसा पूर्व
पाटलिपुत्र, पटना
उत्तराधिकारी दशरथ मौर्य
पत्नी देवी (वेदिस-महादेवी शाक्यकुमारी)
कारुवाकी (द्वितीय देवी तीवलमाता)
असंधिमित्रा - अग्रमहिषी,
पद्मावती
तिष्यरक्षिता

वंश मौर्य
पिता बिन्दुसार
माता सुभद्रांगी (उत्तरी परम्परा), रानी धर्मा (दक्षिणी परम्परा)
अशोक महान का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय)। (राजकाल ईसापूर्व 273-232) प्राचीन भारत में मौर्य राजवंश का चक्रवर्ती राजा था। उसके समय मौर्य राज्य उत्तर में हिन्दुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण तथा मैसूर तक तथा पूर्व में बंगाल से पश्चिम में अफ़गानिस्तान तक पहुँच गया था। यह उस समय तक का सबसे बड़ा भारतीय साम्राज्य था। सम्राट अशोक को अपने विस्तृत साम्राज्य से बेहतर कुशल प्रशासन तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए जाना जाता है।

जीवन के उत्तरार्ध में अशोक तथागत बुद्ध(सिद्धार्थ गौतम) की मानवतावादी शिक्षाओं से प्रभावित होकर बौद्ध हो गये और उन्ही की स्मृति मे उन्होने एक स्तम्भ खड़ा कर दिया जो आज भी नेपाल में उनके जन्मस्थल - लुम्बिनी - मे मायादेवी मन्दिर के पास अशोक स्तम्भ के रुप मे देखा जा सकता है। उसने बौद्ध धर्म का प्रचार भारत के अलावा श्रील में विदेश से कई छात्र शिक्षा पाने भारत आया करते थे


आरंभिक जीवन
अशोक मौर्य सम्राट बिन्दुसार तथा रानी धर्मा का
पुत्र था। लंका की परम्परा में बिंदुसार की सोलह
पटरानियों और 101 पुत्रों का उल्लेख है। पुत्रों में केवल
तीन के नामोल्लेख हैं, वे हैं - सुसीम जो सबसे बड़ा था,
अशोक और तिष्य। तिष्य अशोक का सहोदर भाई और
सबसे छोटा था।एक दिन उसको स्वप्न आया उसका बेटा
एक बहुत बड़ा सम्राट बनेगा। उसके बाद उसे राजा
बिन्दुसार ने अपनी रानी बना लिया। चुँकि धर्मा कोई
क्षत्रिय कुल से नहीं थी अतः उसको कोई विशेष स्थान
राजकुल में प्राप्त नहीं था। अशोक के कई (सौतेले) भाई -
बहने थे। बचपन में उनमें कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती थी। अशोक
के बारे में कहा जाता है कि वो बचपन से सैन्य
गतिविधियों में प्रवीण था। दो हज़ार वर्षों के पश्चात्,
अशोक का प्रभाव एशिया मुख्यतः भारतीय
उपमहाद्वीप में देखा जा सकता है। अशोक काल में उकेरा
गया प्रतीतात्मक चिह्न, जिसे हम ' अशोक चिह्न ' के
नाम से भी जानते हैं, आज भारत का राष्ट्रीय चिह्न है।
बौद्ध धर्म के इतिहास में गौतम बुद्ध के पश्चात् अशोक
का ही स्थान आता है।
दिव्यदान में अशोक की एक पत्नी का नाम
'तिष्यरक्षिता' मिलता है। उसके लेख में केवल उसकी
पत्नी 'करूणावकि' है। दिव्यादान में अशोक के दो
भाइयों सुसीम तथा विगताशोक का नाम का उल्लेख है।

साम्राज्य-विस्तार
अशोक का ज्येष्ठ भाई सुशीम उस समय तक्षशिला का
प्रांतपाल था। तक्षशिला में भारतीय-यूनानी मूल के
बहुत लोग रहते थे। इससे वह क्षेत्र विद्रोह के लिए उपयुक्त
था। सुशीम के अकुशल प्रशासन के कारण भी उस क्षेत्र में
विद्रोह पनप उठा। राजा बिन्दुसार ने सुशीम के कहने पर
राजकुमार अशोक को विद्रोह के दमन के लिए वहाँ
भेजा। अशोक के आने की खबर सुनकर ही विद्रोहियों ने
उपद्रव खत्म कर दिया और विद्रोह बिना किसी युद्ध के
खत्म हो गया। हालाकि यहाँ पर विद्रोह एक बार फिर
अशोक के शासनकाल में हुआ था, पर इस बार उसे बलपूर्वक
कुचल दिया गया।
अशोक का साम्राज्य
अशोक की इस प्रसिद्धि से उसके भाई सुशीम को
सिंहासन न मिलने का खतरा बढ़ गया। उसने सम्राट
बिंदुसार को कहकर अशोक को निर्वास में डाल दिया।
अशोक कलिंग चला गया। वहाँ उसे मत्स्यकुमारी
कौर्वकी से प्यार हो गया। हाल में मिले साक्ष्यों के
अनुसार बाद में अशोक ने उसे तीसरी या दूसरी रानी
बनाया था।
इसी बीच उज्जैन में विद्रोह हो गया। अशोक को सम्राट
बिन्दुसार ने निर्वासन से बुला विद्रोह को दबाने के
लिए भेज दिया। हालाकि उसके सेनापतियों ने विद्रोह
को दबा दिया पर उसकी पहचान गुप्त ही रखी गई
क्योंकि मौर्यों द्वारा फैलाए गए गुप्तचर जाल से उसके
बारे में पता चलने के बाद उसके भाई सुशीम द्वारा उसे
मरवाए जाने का भय था। वह बौद्ध सन्यासियों के साथ
रहा था। इसी दौरान उसे बौद्ध विधि-विधानों तथा
शिक्षाओं का पता चला था। यहाँ पर एक सुन्दरी,
जिसका नाम देवी था, उससे अशोक को प्रेम हो गया।
स्वस्थ होने के बाद अशोक ने उससे विवाह कर लिया।
कुछ वर्षों के बाद सुशीम से तंग आ चुके लोगों ने अशोक
को राजसिंहासन हथिया लेने के लिए प्रोत्साहित
किया, क्योंकि सम्राट बिन्दुसार वृद्ध तथा रुग्ण हो चले
थे। जब वह आश्रम में थे तब उनको खबर मिली की उनकी
माँ को उनके सौतेले भाईयों ने मार डाला, तब उन्होने
महल मे जाकर अपने सारे सौतेले भाईयों की हत्या कर दी
और सम्राट बने।
सत्ता संभालते ही अशोक ने पूर्व तथा पश्चिम, दोनों
दिशा में अपना साम्राज्य फैलाना शुरु किया। उसने
आधुनिक असम से ईरान की सीमा तक साम्राज्य केवल
आठ वर्षों में विस्तृत कर लिया।
कलिंग
लड़ाईलड़ाई
अशोक ने अपने राज्याभिषेक के ८वें वर्ष (२६१ ई. पू.) में
कलिंग पर आक्रमण किया था। आन्तरिक अशान्ति से
निपटने के बाद २६९ ई. पू. में उसका विधिवत् अभिषेक हुआ
तेरहवें शिलालेख के अनुसार कलिंग युद्ध में एक लाख ५०
हजार व्यक्ति बन्दी बनाकर निर्वासित कर दिए गये, एक
लाख लोगों की हत्या कर दी गयी। सम्राट अशोक ने
भारी नरसंहार को अपनी आँखों से देखा। इससे द्रवित
होकर अशोक ने शान्ति, सामाजिक प्रगति तथा
धार्मिक प्रचार किया।
कलिंग युद्ध ने अशोक के हृदय में महान परिवर्तन कर दिया।
उसका हृदय मानवता के प्रति दया और करुणा से उद्वेलित
हो गया। उसने युद्धक्रियाओं को सदा के लिए बन्द कर
देने की प्रतिज्ञा की। यहाँ से आध्यात्मिक और धम्म
विजय का युग शुरू हुआ। उसने बौद्ध धर्म को अपना धर्म
स्वीकार किया।
सिंहली अनुश्रुतियों दीपवंश एवं महावंश के अनुसार
अशोक को अपने शासन के चौदहवें वर्ष में निगोथ नामक
भिक्षु द्वारा बौद्ध धर्म की दीक्षा दी गई थी।
तत्पश्चात् मोगाली पुत्र निस्स के प्रभाव से वह पूर्णतः
बौद्ध हो गया था। दिव्यादान के अनुसार अशोक को
बौद्ध धर्म में दीक्षित करने का श्रेय उपगुप्त नामक बौद्ध
भिक्षुक को जाता है। अपने शासनकाल के दसवें वर्ष में
सर्वप्रथम बोधगया की यात्रा की थी। तदुपरान्त अपने
राज्याभिषेक के बीसवें वर्ष में लुम्बिनी की यात्रा की
थी तथा लुम्बिनी ग्राम को करमुक्त घोषित कर दिया


बौद्ध धर्म अंगीकरण
तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक द्वारा
बनाया गया मध्य प्रदेश में साँची का स्तूप
कलिंग युद्ध में हुई क्षति तथा नरसंहार से उसका मन लड़ाई
करने से उब गया और वह अपने कृत्य से व्यथित हो गया।
इसी शोक में वो बुद्ध के उपदेशों के करीब आता गया और
उसने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया।
बौद्ध धर्म स्वीकीर करने के बाद उसने उसको अपने जीवन
मे उतारने की कोशिश भी की। उसने शिकार तथा पशु-
हत्या करना छोड़ दिया। उसने ब्राह्मणों अन्य
सम्प्रदायों के सन्यासियों को खुलकर दान दिया।
जनकल्याण के लिए उसने चिकित्यालय, पाठशाला तथा
सड़कों आदि का निर्माण करवाया।
उसने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने धर्म प्रचारक
नेपाल, श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान , सीरिया , मिस्र तथा
यूनान तक भेजे। उसने इस काम के लिए अपने पुत्र ओर पुत्री
को यात्राओं पर भेजा था। अशोक के धर्म प्रचारकों मे
सबसे अधिक सफलता उसके पुत्र महेन्द्र को मिली। महेन्द्र
ने श्रीलंका के राजा तिस्स को बौद्ध धर्म मे दीक्षित
किया, जिसने बौद्ध धर्म को अपना राजधर्म बना
दिया। अशोक से प्रेरित होकर उसने अपनी उपाधि
'देवनामप्रिय' रख लिया।